रोजगार का लॉलीपॉप, क्‍या माफ करेंगे बेरोजगार


                     रोजगार का लॉलीपॉप, क्‍या माफ करेंगे बेरोजगार


-रोजगार मेले के नाम पर धोखा
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भोपाल। मध्‍यप्रदेश की शिवराज सरकार ने प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवकों के साथ बडा धोखा किया हैा रोजगार का लॉलीपॉप थमाकर नौकरी की झुठी आंस जगाई हैा लेटर ऑफ इंटेट एलओआई का झुनझुना देकर बेरोजगार युवकों को गुमराह किया गया हैा गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति बेहद गंभीर है। पिछले 2 वर्षों में बेरोजगारी 53% बढ़ गयी है। रोज 2 युवा बेरोजगारी के कारण आत्महत्या
कर रहे हैं, नयी कम्पनियाँ आ नहीं रही हैं और पुरानी कंपनियां भी बंद हो रही हैं।
 ऐसे में 4 अगस्त को पूरे प्रदेश के युवाओं को 1 दिन में 1 लाख नौकरियाँ देने का ढोंग रचा गया।
प्रदेश में बेरोजगारी का आलम यह है कि पटवारी भर्ती में करीब 9 लाख से अधक आवेदन आए थेा बल्कि 9 हजार पद ही पटवारी के भरे जाने थेा यहां यह बताना आवश्‍यक है कि ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट के नाम पर राज्‍य सरकार सौ करोड से अधिक फूंक चुकी हैा जबकि प्रदेश में कंपनियों और उदयोग के खुलने के आसार ही नहीं बनेा
जब सरकार सरकारी नौकरी देने में विफल रही तो रोजगार मेले लगाकर 2.94 लाख लोगों को नौकरी/स्वरोजगार देने की बात कहीं गईा यह पूरा प्रपंच केवल बेरोजगार युवकों को ठगने के लिए किया गया। सरकार ने दावाwww.bhaskarjobs.com किया कि 1,25,758 नियुक्तियां की गयी हैं और स्वरोजगार के 60 हजार और मुद्रा लोन के 1 लाख हितग्राहियों समेत कुल 2,97,069 लोगों को नौकरी/स्वरोजगार दिया गया है। जबकि वास्तविकता इससे बिलकुल अलग है।
सवाल जिनके जवाब मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह को देना है-
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1)
सरकार ने संख्या बढ़ाकर दिखाने और रोजगार मेलों की विफलता छुपाने के लिए रोजगार, स्वरोजगार और मुद्रा लोन के हितग्राहियों का आंकड़ा एक साथ दिया।
2) भोपाल में 3 जुलाई को आयोजित जॉब फेयर का नाम "मैनेजमेंट जॉब फेयर" था और उसमें कई बड़ी कंपनियों जैसे फ्लिपकार्ट, स्नैपडील आदि थीं, लेकिन सभी कंपनियों में मैनेजमेंट की नहीं बल्कि 10 वीं पास लोगों के लिए नौकरियां थी जो डाटा एंट्री ऑपरेटर और सामान डिलीवर करने वालों के लिए थीं।
3) जो नौकरियाँ रोजगार मेले में दी जा रही थी वो आम तौर पर 10 वीं पास व्यक्ति के लिए थीं। जबकि अप्लाई करने वाले अधिकतर लोग कम से कम ग्रेजुएट थे।
4) इंटरनेशनल जॉब फेयर में फ्रेशर्स के लिए एक भी नौकरी नहीं थी। अनुभवी लोगों इसमें आये ही नहीं और इस जॉब फेयर के नाम पर भी केवल जनता के पैसे की बर्बादी हुई
5) सबसे प्रमुख बात यह थी कि जिन 1,25,758 "नियुक्तियों" की बात खुद कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड के अध्यक्ष श्री हेमंत देशमुख ने ऑन कैमराकही है, दरअसल वे नियुक्तियां नहीं हैं बल्कि केवल LoI (Letter of Intent, आशय पत्र) हैं।जिसका उतना ही मतलब है जितना MoU का। खुद मुख्यमंत्री अनेकों बार मंच से MoU को कागज़ का टुकड़ा बोल चुके हैं। साफ़ तौर पर युवाओं को नौकरी के नाम पर आशय पत्र देकर बेवक़ूफ़ बनाया गया है।
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